Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









                                   



इतनी सारी बाते जो मैं कह देता तुमसे
मैं सोचता हु अब और कोई न आएगा
फ़िर जाने कब मिल पाऊ तुमसे
और फ़िर अब वक्त कहा मिल पायेगा
सोचा कह दू तुमसे मिलने की चाह में क्या क्या कर जाता
सोचा के बतलाऊ तुम्हे की एकाकी रह कैसे वोह बदलो में छुप जाता
सोचा की बतलाऊ उन सुइयों की दूरी जिनमे सारा वक्त गुज़र जाता
और सोचा कह दो वोह बात जो कबसे मन में चुभती है
इतनी सारी बाते जो मैं कह देता तुमसे
मैं सोचता हु अब और कोई न आएगा


फ़िर सोचा के क्या है इन बेमानी सी बातों का
इससे अच्छा तो होगा के कुछ हाल तुम्हारा सुन लूँगा
और भूली भूली सी थी इक आवाज़ इन कानो में
फ़िर बैठ आराम से वही पुरानी धुन लूँगा
इतनी सारी बाते जो मैं कह देता तुमसे
मैं सोचता हु अब और कोई न आएगा


और बस मैं क्या कह पाउँगा यही सोच फ़िर खो जाता हूँ
जब तक सोचा के कुछ देर बैठ , सारी बातिएँ बतलाता हूँ
कुछ और दूर चलता हूँ , कुछ और भी सोच लेता हूँ
पाया के शायद, तुम अब साथ नही
और फ़िर अब वक्त कहाँ मिल पायेगा



Updated: May-2009

Email : vishwas@kaavyanjali.com