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ना तुझे खोना है,
ना तुझे पाना है |
तेरे तन से तो मैं
हूँ रूबरू,
अब तुझे रूह में
बसाना है
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तेरी धडकनों को
तो मैं सुन ना सका |
पर अब तेरे अक्स को
आजमाना है
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घुप अँधेरे में
खड़े इस
सूखे पेड़ को
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अब ज़िन्दगी की रौशनी से
नहाना है |
हाँ मुझे,
तुझे अपनी रूह में बसाना है |
वक़्त निकल गया आगे,
मैं रह गया पीछे मोड़ पे |
अब भी मैं खडा हूँ वही,
जहाँ से गयी थी तू मुझे छोड़ के
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तेरा इंतज़ार करूँगा मैं,
ये मेरा वादा है
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सासों के
बंद हो जाने पर भी,
तेरा साथ निभाने का
इरादा है
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मोहब्बत क्या
थी,
क्या है?
तेरे रहते मैं
ये जान ना सका |
तू कब कुछ से सब हो गयी,
मैं ये पहचान ना
सका |
पर अब
मैं तुझे कहीं जाने ना दूंगा |
तेरे एहसास,
तेरी याद को मुझे सताने ना
दूंगा |
पानी की इक
बूँद सी,
अब मुझ मिट्टी में
तू मिल जायेगी |
रब भी ख़ुशी से गायेगा,
जब तू मेरी रूह में बस
जायेगी |
तब तू दूर भी होगी,
तब भी पास ही रहेगी |
दो पावन मनों के
मिलन से,
जब ये दुनिया सजेगी |
तब सिमट जायेंगे सब इम्तिहान,
जो जीवन ने हैं अब तक लिए |
पंची छेड़ेंगे ताल और पेड़ लादे फूल खड़े होंगे हमारे लिए
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तब लगेगा की तेरे बिन बिताया वक़्त भी था शायद इसी पल के लिए
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और खुदा ने भी की थी साजिश,
हमारी रूह के मिलन के लिए |
Updated: May-2009 |