Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 

                                                                    

वर्मा जी ऑफीस के आका, चले है इनकी धोंस 
पर इनके घर में तो बीवी ही इनकी बॉस 

ऑफीस में ये रोब जमात, गरज-गरज चिल्लाते 
फ़ोन जब बीवी का आए, तो चुप हो जाते 

एक दिन भरी मीटिंग में, रहा इन्हे पसीना 
तब पता चले की मैडम ने इनका मुश्किल किया है जीना 

मन में हो रही उथल -पुथल, सोचा की पता लगाऊ
जो शेर गरजे है ऑफीस में, वो क्यो करता है मियाऊ 

जा पहुँचा बॉस के घर और घंटी बजाई 
अंदर से कोई चिल्लाया 'कोन खड़ा है भाई' 

मेरी भी सास रुक गयी और पाँव लगे थे हिलने 
सोच
रहा था आयी शामत , जो बॉस से आया मिलने 

पर जुटा के सारी हिम्मत, फिर दरवाज़ा खटखटाया 
फिर कोई ज़ोर से बोला देखो कौन है आया 

दरवाजा खुला तो सामने खड़े थे मेरे सर 
मुझे पहुँचा देख शायद वो गये थे डर 

बोले कैसे हो क्यो आए क्या हो गयी बात 
अगर ज़रूरी ना हो तो ऑफीस में करो मुलाकात 

मैं भी पूरा सोच के आया, के ना आऊंगा बाज 
तभी पलायन करूँगा, जब जानूँगा इनका राज 

कहा सर जी ना कोई बात ना कोई फरियाद 
बस आप से मिलने को जी है चाहा जब आप की आई याद 

 बाते कर के यहा -वहां की, मैं बना रहा था राय 
तभी मैडम अंदर से बोली - "गर धो लिए हो कपड़े तो बना लो चाय

बॉस मेरे सकपकाये यहा -वहां थे झाके 
उनकी ऐसी हालत देख की खिल गयी मेरी बाँछे 

सोचा हम पर रोब जमाए, खूब खेले खेल 
ऑफीस मैं तो पास हो गये,घर में तो है फेल 

ऑफीस मैं रहे टिप-टॉप, घर में पहने कपड़े मैला 
सोच रहा था की देखो, नहले-को मिल गया दहला 

Updated: Aug-2010

Email : vishwas@kaavyanjali.com