Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 


 




कल सुबह जो सुरज उगे,
रौशनी भरपूर दे. 
बरसो से बंद अँधेरे को,
एक नया गगन वो दे .
देखे सब राह तेरी ,
तरसी व प्यासी आँखों से .
आ भी जा तू सामने ,
ख़ामोशी को जुबान तू दे . 
कल सुबह ...


कल सुबह बन जाये ख़ास ,
ऐसी हो बाते जो रच डाले इतिहास .
था हमेशा सोच में जो ,
होश में बनजाये वो बात.
इतना जातां करले की अपनी,
सोच में तू रंग भरे .
कल सुबह ......
 


सादगी और साधना ,
दोनों का मिश्रण जो हो .
प्रेरणा से पूर्ण तेरी ,
भावना का नया जन्म हो .
कर अनोखा काम की ,
माया से तुझे मुक्ति मिले .
कल सुबह ...,
 


चारो तरफ है हर कोई ,
रहा टक्के तेरे लिए .
तेरी प्रतीक्षा में न जाने ,
कितने हजारो दिन जले .
कदमो की अहटो से अपनी ,
तृप्ति हमारे मनन को दे .
कल सुबह जो सूरज ...
 


पक्षियों की ये उड़ान ,
कर रही मुझे बयान .
मिल गया उन्हें है मनो ,
अपना गगन ,अपना जहाँ.
चल बड़ा कदम की पायेगा ,
मेरा साथ हर दूरी पे .
कल सुबह जो सूरज ...


Updated: Dec-2010

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