Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 


लिखते  लिखते  रुक  गया  हूँ , सोचता  हूँ  क्या  लिखूं ,
हर  तरफ  हे  जिक्र  तेरा , क्या  में  फिर  नया  लिखूं
दिल  में  मेरे  रहने  वाले
घर  तेरा  दूजा  भी  हे ,
ख़त  तुझे  में  लिख  तो  दूँ
पर  क्या  तेरा  पता  लिखूं

लिखते  लिखते  रुक  गया  हूँ , सोचता  हूँ  क्या  लिखूं ,
हर  तरफ  हे  जिक्र  तेरा , क्या  में  फिर  नया  लिखूं
मजहबों  पे  सियासत 
करने  का  जिनको  शौक   हे ,
पूछते  हैं  धर्म  जब
में  नाम  बस  तेरा  लिखूं

लिखते  लिखते  रुक  गया  हूँ , सोचता  हूँ  क्या  लिखूं ,
हर  तरफ  हे  जिक्र  तेरा , क्या  में  फिर  नया  लिखूं   
हैसियत  मेरी  नहीं  हे
चाँद  तारे  तोड़  लूँ ,
मेरी  हर  एक  सांस  तुझसे
जान  भी  तेरे  नाम  लिखूं

लिखते  लिखते  रुक  गया  हूँ , सोचता  हूँ  क्या  लिखूं ,
हर  तरफ  हे  जिक्र  तेरा , क्या  में  फिर  नया  लिखूं
 

Updated: Mar-2011

Email : vishwas@kaavyanjali.com

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