Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 

                                   

(1)

रिमझिम सावन की प्रथम फ़ुहार
उमड-घुमड बाद्लों ने गाये मल्हार
प्रीत का जब अन्कुर फ़ूटा
तो आया जीवन में पहला प्यार!!

ऐसे हम मिल गये राह में
ज्युं चटक स्वाति की चाह में

हँस पडी सभी दिशायें
मन में छाया खुमार
जब आया जीवन में पहला प्यार!!

मन को बहुत रोका हमने
सौ बातों से टोका हमने
प्रीत की पर जो चली बयार
लिये प्यार ने पंख पसार
जब आया जीवन में पहला प्यार!!

बातों में जब रातें कटीं
दूरियाँ तब दिल की मिटीं
पुलकित हुआ मन ऐसे
गुलशन में जैसे आयी बहार
जब आया जीवन में पहला प्यार!!

बडा मधुर था वो एह्सास
था अपना सारा आकाश
नयी उमंगें थी मन में
रंग बिरंगा था संसार
जब आया जीवन में पहला प्यार!!

(2)

की रात दिन जिसकी कामना
मन से जिसकी की आराधना
इक दिन वो छोड गया ऐसे
जैसे हमसे नहीं कोई सरोकार
कठोर बडा था पहला प्यार!!

मन की पीडा आंखों से बही
जीने की भी चाह ना रही
अपनाया किसी और को
दिल मेरा किया तार तार
मिला प्यार में दर्द अपार!!

विश्वास जिस पे हम करते रहे
वो हर घडी हमें छलते रहे
दिया धोखा इतना बडा
आत्मा पर किया प्रहार
निकली ह्रदय से चीत्कार!!

टूट गये सपने सारे
बिखर गया मेरा संसार
आहत इस कदर हुई भावना
रोते हैं हम् ज़ार-ज़ार
काश ना आता पहला प्यार!!

छीन कर खुशियां मेरी
अपना घर बसा लिया
छोड कर तन्हा मुझे
किसी और से दिल लगा लिया
क्यूं किया ये अत्याचार?

(3)

प्यार मेरा सच्चा है अगर
वापिस तुमको आना होगा
जितना दर्द दिया तुमने
आकर उसे मिटाना होगा
है मेरा प्यार तुम पर उधार!!

अपने कहे से तुम न फ़िरना
मान मेरे प्यार का रखना
करे कोई प्रतीक्षा तुम्हारी
बात सदा ये याद रखना
प्यार मेरा ये करे पुकार!!

जो तोडे अपने वचन
क्षमा कभी ना उसे मिले
पश्चाताप की अग्नि में
दिन रात वो जला करे
प्रार्थना मेरी हो स्वीकार!!

छोडा तुमने साथ मेरा
भूलाना मगर ना मेरा प्यार
इतना सा कर देना उपकार
आ जाना मिलने मुझसे
छोडूं जब ये सन्सार!!


Updated: Mar-2009

Email : vishwas@kaavyanjali.com