Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 

                                                                    

लाखो का निकला टेंडर और जेबे हो गयी फुल 
उद्घाटन से पहले देखो टूट गया था पुल 
जनता
की मेहनत की कमाई इस पुल मे हुई बर्बाद 
पर किसी के घर बन गये कोई हुआ आबाद

नही पता इन्हे की क्या टूटे पुल का कहानी
घटिया सा सामान लगाया खूब करी मनमानी 
पुल से ज्यादा इनको चिंता कमीशन  की सताई 
सोच रहे थे ज्यादा से ज्यादा इससे करो कमाई 

 बना के तैयार कर दी इन्होने जिंदा लाश
पैसे देकर आकओ से पुल कराया पास 
सजी
खूब महफ़िल थी उस दिन हाउस हुआ था फुल 
नेता जी फीता काटे उससे पहले टूटा पुल 

सभी के सपने ऐसे टूटे जैसे टूटे कॉच 
नेता जी कह के चल दिए की कराये जांच
जनता को दे जाच का लोलीपाप मामला किया था गुल 
देशद्रोही फिर मिल बैठे बनाने को नया पुल 

सोच रहा राजीव की उपर वाले ने किया एहसान
जो
पुल टूटता बाद मैं तो जाती कितनी जान 

Updated: Aug-2010

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