Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









 

                                                                    

एक  किताब  थी ये  ज़िन्दगी ,
जिसका  एक  नया  पन्ना  में  हर  दिन  पलटती   रही ,
और  एक  नया  पन्ना  इसमें  जुड़ता   गया ,
कभी  हँसी इन्हें  पढ़  कर  में  दो  पल  के  लिए ,
तो  कभी  सोई  लेकर  आँखों  में  नमी ,
कभी  सपनों   को  सजोया  मैंने ,
तो  कभी  अपने  बिखरे  सपनों  के  टुकडो   को  एक  धागे  में  पिरोया  मैंने ,
हर   पन्ने  पर  एक  नया  दोस्त  मिला ,
कुछ  पन्नो  का   ही  था  उसका  मेरा  सफ़र ,
एक  सफ़र  ख़त्म  हुआ  तो  दूसरा  शुरू  हुआ ,
कभी  पन्ने  ख़त्म  होते  नहीं  इस  किताब  के ,
रूकती  नहीं  , ख़त्म  होती  नहीं  एक  सफ़र  पर  ये ,
बस  चलती  रहती  हैं  ये  ज़िन्दगी ,
हर  नयी  कहानी  के  लिए  में  एक  नया  पन्ना  पलटती   रही,
और  एक  नया  पन्ना  जुड़ता  गया ,
बस  चलती  रहीं  ये  ज़िन्दगी .

 

Updated: Jul-2010

Email : vishwas@kaavyanjali.com